भारतीय संस्कृति में सूर्य को जल देने का क्या महत्व है?

सूर्य देव हैं इस ब्रह्मांड के पहले कर्मयोगी हैं । सूर्य साधना मनुष्य के जीवन में छाए घटाटोप अंधेरे का शमन करके उसे नई ऊर्जा एवंनवीन आशा से भर देती है। इस सत्य का ज्ञान ही गायत्री का प्रकाश है, जो मनुष्य के जीवन को आलोकित करता है । और इस सत्य की पुनरावृत्ति करने के लिए ही गायत्री मंत्र जप द्वारा सूर्य को जल देने की परंपरा है। दरअसल, सूर्य का प्रचंड प्रकाश, उसका तेज, कर्म पथपर उसकी निरंतरता का प्रतीक है, पर सूर्य थकता नहीं, क्योंकि इस जगत के प्रति सूर्य का उत्तरदायित्व है। प्रतीक रूप में सूर्य को जल अर्पित कर उसे हम अपना आभार प्रकट करते हैं।


सूर्य के उगने के साथ ही दिन का आरंभ होता है और उसके अस्त होते ही दिन भर की गतिविधियों पर विराम लगने लगता है। यह नियम जब से यह जगत है, उस समय से नियमित रूप सूर्य का प्रचंड प्रकाश, उसका तेज, कर्म पथपर उसकी निरंतरता का प्रतीक है, पर सूर्य थकता नहीं, क्योंकि इस जगत के प्रति सूर्य का उत्तरदायित्व है। प्रतीक रूप में सूर्य को जल अर्पित कर उसे हम अपना आभार प्रकट करते हैं। सूर्य के उगने के साथ ही दिन का आरंभ होता है और उसके अस्त होते ही दिन भर की गतिविधियों पर विराम लगने लगता है।


 यह नियम जब से यह जगत है, उस समय से नियमित रूप से गतिशील है, क्योंकि सूर्य इस ब्रह्मांड के प्रथम कर्मयोगी हैं। सुबह उठ कर सूर्य के दर्शन करना या फिर स्नान के बाद सूर्य कोजल देना हमारी जीवनशैली का अंग है। योग और सांसारिक गतिविधियां दोनों के बीच समन्वय सूर्य बिठाते हैं, जिसका प्रमाणपवनपुत्र हनुमान द्वारा प्रारम्भ किया गया सूर्य नमस्कार है। यह संभवतः हनुमान का अपने गुरुसूर्य के प्रति कृतज्ञता का ज्ञापन है, जिसकी तपिश की परवाह किए बिना हनुमान उनके आगे उड़ते हुए वेदों का ज्ञान प्राप्त करते हैं।



मान्यता है कि सूर्य सात घोड़ों द्वारा जुते हुए रथ पर विराजमान हैं। सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों को इंगित करते हैं। जिस रथ पर सूर्य सवार हैं, उसमें 12 पहिए लगे हुए हैं और हर पहिये में 24 तीलियां। इन सबका भी गहरा अर्थ है- 12 पहिए, 12 महीनों को इंगित करते हैं और पहिए की तीलियां दिन के 24 घंटे हैं।'


शं नो देवः सविता त्रायमाणः
शं नो भवन्तुषसो विभातीः
शं नः पर्जन्यो भवन्तु प्रजाभ्यः
शं नः क्षेत्रस्य पतिरस्तु शम्भुः।'
अथर्ववेद में ऋषि सूर्यदेव से प्रार्थना करते हुए कहते हैं- भय वसंताप से रक्षा करने वाले सवितादेवहम सबके अनुकूल हों।अंधकारका अंत करने वाली उषादेवी हमारेकल्याण के लिए प्रयत्नशील हों,सूर्य की किरणों से उत्पन्न मेघ सारी प्रजा के किए कल्याणकारी हों एवं क्षेत्रपति शम्भु हम सबके सुख, शांति एवं कल्याण के लिए प्रसन्न हों.

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