समझदारी से करें अच्छे कोचिंग क्लास का चुनाव :-
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए स्टूडेंट्स को बहुत तैयारी की आवश्यकता होती है. इसके लिए अधिकांश स्टूडेंट्स कोचिंग क्लासेस में एडमिशन लेते हैं. लेकिन एक अच्छे कोचिंग संस्थान का चयन करना अपने आप में एक चुनौती है. आइए जानें, अच्छी कोचिंग क्लास का चुनाव करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए : -

डेमो क्लास :-
एक अच्छी प्रशिक्षण संस्था आमतौर पर छात्रों को कुछ डेमो/ टेस्ट कक्षाएं प्रदान करती है, ताकि छात्रों को उनकी शिक्षा की गुणवत्ता का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन किया जा सके.

शिक्षक / छात्र रेशो :-
मूल रूप से कोचिंग क्लासेस का अर्थ है प्रत्येक छात्र की तरफ व्यक्तिगत ध्यान देना, लेकिन आजकल कोचिंग क्लासेज स्वयं कॉलेजों जैसे संस्थानों में बदल गए हैं. यदि शिक्षक-छात्र रेशो कम है, तो प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करने में अधिक मदद मिलेगी. बैच जितनी छोटी होगी, शिक्षक से आपको उतना अधिक व्यक्तिगत अटेंशन मिलेगा.

शुल्क संरचना :-
क्या मासिक आधार पर शुल्क का भुगतान किया जा सकता है? यदि शिक्षकों और छात्रों के बीच ट्यूनिंग नहीं बैठती है, तो शुल्क वापसी नीति क्या है? आमतौर पर ये सवाल सबसे पहले अभिभावकों को कोचिंग संगठन से पूछने चाहिए.

शिक्षकों का अनुभव :-
माता-पिता अपने बच्चों के लिए इस संस्था को इसलिए चुन रहे हैं ताकि वे अच्छे शिक्षकों से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें.माता-पिता को शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता, अनुभव आदि के बारे में विस्तृत इन्फार्मेशन प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए.

विषय :-
क्या इस संस्थान में एक पूरे विषय को पढ़ाने के लिए एक ही शिक्षक जिम्मेदार है या कई शिक्षक एक ही विषय के लिए कई बार बदले जाएंगे? यह महत्वपूर्ण प्रश्न है. इस बारे में जानकारी निकालनी चाहिए.

अध्ययन सामग्री की गुणवत्ता :-
कोचिंग संस्थान से उपलब्ध अध्ययन सामग्री अप-टु-डेट, व्यापक, उच्च गुणवत्ता वाली हो, यह सुनिश्चित करने के लिए ध्यान रखा जाना चाहिए. नियमित वर्ग कंडक्ट, इंटरएक्टिव सेशन्स, बेहतर स्कोर करने की टिप्स और ट्रिक्स, पाठ्यक्रम को पूरा करने की निर्धारित समयसीमा आदि बातों का भी ध्यान रखना जरूरी है. इससे छात्रों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि उनके पास विषय का रिवीजन करने का कितना समय होगा.

टेस्ट :-
कोचिंग संस्था को नियमित रूप से साप्ताहिक टेस्ट, मासिक टेस्ट, चैप्टर वाइज टेस्ट और पिछले साल के पेपर्स की मॉक टेस्ट आयोजित करने चाहिए. माता-पिता को मार्क्स की रिपोर्ट नियमित रूप से मिलनी चाहिए.