जानिए जल दान का महत्व

जल को जीवन माना जाता है ।  पंच महाभूतों में से जल प्रधान स्थान पर रहेता हे क्यू की जल का उत्पत्ति सबसे पहले हुआ था ।  जल में ही जीवन का सृष्टि हुआ । जल मनुष्य शरीर के लिए एक अत्यावश्यकि पदार्थों में से हैं । जिसे चक्षु दान महा पुण्य कहलाता है, बैसे ही जल दान को भी भारतीय सस्त्र अनुसार महा पुण्य माना जाता है । दुनिया में जो पुण्य सब देने से होता है । और जो फल सब तीर्थों के दर्शन से मिलता है, उसी पुण्य और फल की प्राप्ति केवल जलदान करने से हो जाती है ।

 जो जलदान में असमर्थ है, ऐसे ऐश्वर्य की अभिलाषा रखने वाले पुरुष को उचित है कि वह दूसरे को प्रबोध करे, दूसरे को जलदान का महत्व समझाए। यह सब दानों से बढ़कर हितकारी है। जो मनुष्य वैशाख मास में मार्ग पर यात्रियों के लिए प्याऊ लगाता है, वह विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है। नृपश्रेष्ठ ! प्रपादान (पौसला या प्याऊ) देवताओं, पितरों तथा ऋषियों को अत्यंत प्रिय है। जो प्याऊ लगाकर थके-मांदे पथिकों की प्यास बुझाता है, उस पर ब्रह्मा, विष्णु और शिव आदि देवतागण प्रसन्न होते हैं।

 राजन् ! वैशाख मास में जल की इच्छा रखने वाले को जल, छाया चाहने वाले को छाता और पंखे की इच्छा रखने वाले को पंखा देना चाहिए। राजेन्द्र ! जो पीड़ित महात्माओं को प्यार से शीतल जल प्रदान करता है, उसे उतनी ही मात्र से दस हजार राजसूय यज्ञों का फल प्राप्त होता है। धूप और परिश्रम से पीड़ित ब्राह्मण को जो पंखा डुलाकर शीतलता प्रदान करता है, वह निष्पाप होकर भगवान् का पार्षद हो जाता है।

 जो मार्ग में थके हुए श्रेष्ठ द्विज को वस्त्र से भी हवा करता है, वह भगवान विष्णु का सायुज्य प्राप्त कर लेता है। जो शुद्ध चित्त से ताड़ का पंखा देता है, उसके सारे पापों का शमन हो जाता है और वह ब्रह्मलोक को जाता है। जो विष्णुप्रिय वैशाखमास में पादुका दान करता है, वह विष्णुलोक को जाता है। जो मार्ग में अनाथों के ठहरने के लिए विश्रामशाला बनवाता है, उसके पुण्य-फलका वर्णन नहीं किया जा सकता। मध्याह्न में आए हुए ब्राह्मण अतिथि को यदि कोई भोजन दे तो उसे अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।

वैशाख में तेल लगाना, दिन में सोना, कांस्यपात्र में भोजन करना, खाट पर सोना, घर में नहाना, निषिद्ध पदार्थ खाना दोबारा भोजन करना निषिद्ध है । जलदान से धर्म-अर्थ -काम-मोक्ष चारों पुरुषार्थों को भी प्राप्त कर लेता है। अतः सभी को वैशाख मास के सदाचार, नियमों और धर्मों का पालन करना चाहिए ।

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