अपने बच्चों को कैसे कंट्रोल में लाए ?



अपने बच्चों को कैसे कंट्रोल में लाए ? 

कुछ ऐसे बच्चे है जो कंट्रोल में नहीं आते है, कई बच्चे बहुत अडियल होते है. जिद पर अड़ जाते है तो किसी के भी कंट्रोल में नहीं आते. लेकिन उन की यह जिद हद से ज्यादा बढ़ जाए तो समस्या खड़ी हो जाती है. ऐसी स्थिति न आए, इस के लिए माता पिता बच्चे की परवरिश में शुरुआत से ही ध्यान दें.

➧ टीचर को दोष न दें :-
अक्सर पेरेंट्स बच्चे के अड़ियल और ढीठ स्वभाव के लिए स्कूल टीचर को भी कठघरे में खड़ा कर देते हैं. इस बात को समझें कि बच्चे के ऐसे व्यवहार के लिए पूरी तरह से टीचर ही दोषी नहीं है, बल्कि आप भी जिम्मेदार हैं. अगर आप चाहें तो टीचर से मिल कर बच्चे को सुधारने के टिप्स ले सकते हैं. ऐसे बच्चे को फिजिकल एक्टिविटी व अन्य शार्पमाइंड गेम्स में डालें ताकि वह बिजी रहे और गलत सलत जिद न करे.

➧ शिष्ट बनाएं :-
बच्चा जो कुछ सीखता है यहां ही, अपने परिवार, दोस्तों से सीखता है. इसलिए बच्चे की गलती पर, बिना कोई कठोर दंड दिए उसे प्यारे से सभ्य, शिष्ट, और अनुशासित बनाएं. यह माता पिता और शिक्षक पर निर्भर करता है कि वे बच्चे को कैसे शिष्ट बनाएं.

➧ दृढ़ता और जिद :-
दृढ़ संकल्प और जिद्दीपन के बीच के अंतर को समझें. दृढ़ संकल्प का अर्थ उद्देश्य की दृढ़ता है. जिद्दीपन को कुछ करने या विशेष तरीके से कार्य करने के लिए एक दृढ़ संकल्प के रूप में परिभाषित किया जाता है. जिद्दीपन से किसी बाहरी दबाव के बावजूद किसी के विचार, व्यवहार या कार्यों को बदलने से इनकार कर दिया जाता है. बच्चों का जिद्दीपन आनुवंशिक भी हो सकता है.

➧ सम्मान करें :-
अड़ियल रवैये वाले बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं और वे इस बात को बहुत गहराई से महसूस करते हैं कि आप उन के साथ कैसा बरताव करते हैं. इसलिए अपनी टोन, बॉडी लैंग्वेज, अपने शब्दों को ले कर खास सावधानी बरतें. जब बच्चों को माता पिता का व्यवहार अच्छा नहीं लगता, तो वे खुद को बचाने के लिए वैसी ही भाषा का उपयोग करने लगते हैं. मतलब, बच्चे विद्रोही हो जाते हैं. बच्चों से काम डांट डपट कर नहीं, बल्कि प्यार से मजेदार तरीके से करवाएं.

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