शादी के बाद खुशियों की सौगात कैसे मिलते है ?


शादी के बाद खुशियों की सौगात कैसे मिलते है ? 

⦿ अगर आपकी कुंडली में गुरु की दशा कमजोर है तो संभव है कि आपकी शादी में अड़चनें आएं और अगर शादी हो भी गई तो कमजोर गुरु उसके बाद की जिंदगी में मुश्किलें पैदा कर सकता है. लेकिन अगर गुरु मजबूत हो तो शादी के बाद खुशियों की सौगात देता है.

पीली चीजों का दान न करें

कुंडली में अगर गुरु अच्छा हो तो विवाह की बाधाओं को समाप्त करता है. लग्न में बैठा हुआ गुरु सर्वाधिक शक्तिशाली होता है और ऐसा गुरु समस्त बाधाओं का नाश कर देता है. अगर गुरु सप्तम भाव में हो तो कभी-कभी व्यक्ति अविवाहित भी रहता है. अगर गुरु अनुकूल हो तो पीली चीजों का दान कभी न करें.

उपाय :-

➤ अगर गुरु खराब हो तो केले का दान करें, सर्वोत्तम होगा.
➤ अगर गुरु के कारण विवाह ही न हो पा रहा हो तो विद्या का दान करें.

❥ बुध और शुक्र

कुंडली के सप्तम भाव में बुध और शुक्र दोनों एक साथ हों तो विवाह के लिए बातें चलती तो रहती हैं, लेकिन विवाह देरी से होता है.

❥ चंद्र कमजोर

कुंडली में चंद्र से सप्तम भाव में गुरु हो तो शादी देर से होती है. यही बात चंद्र की राशि कर्क से भी मानी जाती है. कुंडली के सप्तम भाव में कोई शुभ ग्रह योग न हो तो विवाह में देरी होती है. लग्न भाव में, सप्तम में और बारहवें भाव में गुरु या कोई शुभ ग्रह योग न हो और चंद्र कमजोर हो तो विवाह देर से होता है.

❥ सप्तम में शनि और गुरु

कुंडली का चौथे भाव या लग्न भाव में मंगल हो, सप्तम भाव में शनि हो तो महिला की रुचि शादी में नहीं होती है. जिन लोगों की कुंडली के सप्तम भाव में शनि और गुरु होते हैं, उनकी शादी देर से होती है.

❥ आध्यात्मिक

सूर्य, मंगल और बुध लग्न भाव में हो और गुरु बारहवें भाव में हो तो व्यक्ति आध्यात्मिक होता है और इस वजह से उसके विवाह में देरी होती है.

❥ राहु

महिला की कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी या सप्तम भाव शनि से पीड़ित हो तो विवाह देर से होता है. राहु की दशा में शादी हो, या राहु सप्तम को पीड़ित कर रहा हो तो शादी होकर टूट जाती है. यह सब दिमागी भ्रम के कारण होता है.


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