समाधान (A Hindi Short Story)


समाधान (A Hindi Short Story)

'बेंगलुरु से लौटा तो पता चला, मनीष साथ छोड़कर चला गया है,' मैं सांत्वना देने के लिहाज से प्रकाश जी से कहता हूँ. ग्यारह साल का मनीष अचानक चल बसा, ऐसी जानकारी मिली थी, मुझे. 'हाँ, हमारी कोशिशें कामयाब न हो सकी.' 'इधर सब कुछ ठीक तो चल रहा था. फिर अचानक ऐसा क्या हो गया?'


मनीष के हार्ट में जन्मतः कोई खामी थी, यह जानता था मैं और यह भी कि उसके इलाज के लिए प्रकाश जी ने कोई कसर उठा न रखी थी. "उसे कोई भारी काम करने से मना कर रखा था डॉक्टरों ने यह तो आप जानते ही हैं. इलाज चल रहा था. 'डोनर' की तलाश थी. कोई मिल जाता तो हार्ट रिप्लेस हो जाता. उस रोज स्टेडियम के उद्घाटन के बाद हम लोग घर चले आए थे. उसके स्कूल के शिक्षक ने कहा कि वे अन्य छात्रों के साथ उसे भी स्कूल-बस में घर छोड़ देंगे.


हमारे आने के बाद कुछ छात्र स्टेडियम में चक्कर लगाने लगे. मनीष भी शामिल हो गया उनमें. दो चक्कर लगाए और तीसरे में गश खाकर गिर पड़ा. भागदौड़ की गई पर, किसी काम न आई... . सब व्यर्थ साबित हुआ...!" बहुत बुरा हुआ....आखिर कहना चाहिए, यही मरजी थी ईश्वर की,' मैं हमदर्दी जतलाता हूँ. 'पर एक बात का समाधान है.' 'समाधान...?' 'हाँ, समाधान. हमें कोई डोनर न मिला...पर, हम चार व्यक्तियों को नया जीवन दे पाए. मनीष का लीवर, दोनों किडनी और आँखें डोनेट कर पाए, इसी बात का समाधान है.' मैंने प्रकाश जी के जज्बे को मन ही मन सलाम करते हुए अनायास उनका हाथ अपने हाथ में ले लिया.

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