आपका सर दर्द की वजह ये भी हो सकता है

सिर या त्वचा में होने वाले ऐसे दर्द को त्वचीय ऐलोडायनिया कहा जाता है. इसके अलावा ये दर्द बालों को कंघी करने, बांधकर रखने, शेविंग, शॉवर, चश्मा पहनने या फिर झुमके पहनने की वजह से भी हो सकता है. ऐलोडायनिया पूरे सिर पर फैल सकता है और उस जगह पर किसी भी चीज के संपर्क से दर्द महसूस हो सकता है, यहां तक कि हेयरस्टाइलिंग से भी.

➤ उपाय :-
  •  जब इस तरह का दर्द उठे तो हेयरस्टाइल नहीं बनानी चाहिए, खासकर ऐसी स्टाइलिंग जिसमें सिर पर काफी दबाव पड़ता हो. कसकर पोनीटेल और जूड़ा बिल्कुल नहीं बनाना चाहिए. इसकी जगह आप ढीली पोनीटेल या फिर लो बन बना सकती हैं. 
  • अगर आपका सिर दर्द से फट रहा है तो बालों को खुला छोड़ दें. वर्कआउट करते वक्त बालों को दोनों तरफ बांटें और ढीली चोटी बना सकते हैं. कसकर चोटी बांधने से तुरंत सिरदर्द भले ही न हो, लेकिन कुछ समय में माथे के आसपास बाल जरूर झड़ सकते हैं. ऐसे में हेयरस्टाइल कुछ- कुछ समय में बदलते रहें. अगर आप लंबे समय से साइड पार्टिंग कर रही हैं तो कुछ समय के लिए इसे बदल दें.
  •  चाहे वर्कआउट करना हो या फिर घर की सफाई, ऐसे काम करते वक्त एक हाई पोनीटेल से बेहतर कोई हेयरस्टाइल नहीं होती. एक पोनीटेल बनाना सबसे आसान है और साथ ही ये आपके बालों को बार- बार चेहरे पर गिरने से भी रोकती है. लेकिन बालों को पोनीटेल में कस कर बांधने से सिरदर्द की समस्या भी शुरू हो सकती है, जिसकी वजह से काम पर फोकस करना और भी मुश्किल हो सकता है. ये बिल्कुल सच है. 
  •  आपकी हेयरस्टाइल भी सिरदर्द की पीछे बड़ी वजह हो सकती है. यहां तक कि अगर आप अपने बाल ज्यादा कस कर बांधते हैं तो ये समस्या बढ़ भी सकती है.
➤ ऐसा क्यों होता है ?
  • बालों को पीछे की तरफ खींच कर रबरबैंड से बांधने की वजह से आपके स्कैल्प पर दबाव पड़ सकता है, जिसकी वजह से सिरदर्द शुरू हो सकता है. हेयर फोलिकल्स की नसें खून सप्लाई करती हैं और जब ये खिंचती हैं तो दर्द शुरू हो जाता है. जो लोग माइग्रेन से पीड़ित होते हैं उनके चेहरे और सिर की नसों के अति संवेदनशीलता होने की वजह से इस तरह का सिरदर्द आसानी से हो सकता है.


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